राजदीप सरदेसाई को आर्ट ऑफ लिविंग का जवाब

Mar

27

2016

राजदीप सरदेसाई को आर्ट ऑफ लिविंग का जवाब संजय कुमार आर्ट ऑफ लिविंग के युवा नेतृत्व कार्यक्रम निदेशक हैं। दुनिया भर में युवाओं से जुड़े एओएल के कार्यक्रमों का दिशा-निर्देशन करते हैं। । भारतवर्ष की राजधानी नई-दिल्ली में आयोजित ‘विश्व सांस्कृतिक महोत्सव’ से पूरी दुनिया आश्चर्यचकित है। कोई इसे ‘हैपेनिंग्स इंडिया’ कर रहा है, तो कुछ लोग इसे ‘सांस्कृतिक ओलम्पिक’ की भारत से शुरूआत की संज्ञा दे रहे हैं। विश्व के कई हिस्सों से इस तरह का आयोजन करने हेतु ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ को निवेदन आ रहेI जिस प्रकार विकसित देशों से लेकर विकाशील देशों के पक्ष विपक्ष के राजनेता तथा धार्मिक गुरू एक मंच पर आए, उससे दुनिया अचंभित और रोमांचित है। कहना न होगा कि मध्यपूर्व के देशों से लेकर अफ्रीका, यूरोप तथा एश‍िया सहित उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के राजनितीक और धार्मिक नेताओं ने विश्व के वर्तमान परिदृश्य में ‘विश्व सांस्कृतिक महोत्सव’ को आपसी संवाद बढ़ाने तथा शांति स्थापित करने का मंच माना। संपूर्ण विश्व की मौजूदगी के बावजूद आयोजनकर्ता देश भारत के एक बड़े राजनैतिक वर्ग ने इस महोत्सव का बहिष्कार किया। मीडिया का एक वर्ग इस पर कीचड़ भी उछालता रहा। उल्लेखनीय है कि श्रीश्री रविशंकर के संवाददाता सम्मेलन में भारतीय मीडिया के इस गुट के नकारात्मक व्यवहार पर विदेशी संवाददाताओं ने टिप्पणी भी की थी। किसी भी घटना या आयोजन पर अपना विचार व्यक्त किया जा सकता है, पर ‘विश्व सांस्कृतिक महोत्सव’ की आड़ में जिस प्रकार प्रत्रकारों के एक समूह द्वारा श्रीश्री पर व्यक्तिगत हमला करना शुरू किया है, इससे प्रतीत होता है कि वे किसी मंतव्य या मंशा से प्रेरित हैं। अतः आवश्यक है कि जनहित में इसका मूल्यांकन किया जाये। विश्व सांस्कृतिक महोत्सव में नहीं हुआ कानून का उल्लंघन पिछले सप्ताह टेलीविजन प्रत्रकार राजदीप सरदेसाई ने अपने साप्ताहिक कॉलम के माध्यम से आर्ट ऑफ लिविंग तथा इसके प्रणेता श्री श्री रविशंकर पर व्यक्तिगत हमला किया। राजदीप ने लिखा कि राष्ट्रीय हरित न्यायालय ने ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ पर पांच करोड़ का जुर्माना लगाया है और यह भी कि श्रीश्री ने पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किया। पर वास्तविकता यह है कि न्यायालय ने साफ-साफ कहा है कि ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ ने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। राजदीप, अच्छा होता कि आप कम से कम कानूनी उल्लंघन की बात नहीं करते। ‘कैश फॉर वोट’ कांड में आपकी आपराधिक भूमिका से देश परिचित है। ब्रिटेन या अन्य यूरोपियन देशों में आप होते तो अभी तक जेल की हवा खाते रहते। यहां यह बताते चलें कि राजदीप ने इस कांड में कई आपराधिक षढ़यंत्रों को रचा और संबंधित कानूनों की धज्जिया उड़ाई। प्रसारण नियमावली का उल्लंघन किया तथा दर्शकों और पाठकों को उनके कानूनी और परम्परागत अधिकारों से वंचित किया। उल्लेखनीय है कि ‘वोट फॉर कैश’ मामले में ‘मीडिया स्टडी ग्रुप’ के शोध ने आपको प्रत्यक्ष तौर पर दोषी माना है। यह कांड तो केवल एक उदाहरण मात्र है, आपके प्रत्रकारिता जीवन में कानूनी उल्लंघन के कई ज्ञात तथ्य हैं। गुजरात, असम दंगे पर रिपोर्टिंग पुनः आम और खास आदमी, जाति वर्ग तथा समूदाय के चश्में से देश को देखना कहां तक सही है। आपने गुजरात दंगे के समय हिन्दु-मुस्लिम समुदाय की पहचान करते हुए रिपोर्टिंग की थी, परिणाम स्वरूप गुजरात के गांवों तक दंगा फैल गया था। पुनः रिपोर्ट में आपने दंगाईयों और पीड़ितों की धार्मिक पहचान उजागर करते रहे, जिससे दंगा और भड़क गया। क्या यह सत्य नहीं है कि असम दंगे पर आपने सोशल साईट ट्विटर पर ट्विट किया था, कि जब तक असम दंगे में 1000 हिन्दु नहीं मारे जाऐंगे तब तक राष्ट्रीय चैनलों पर असम दंगे की खबरें नहीं दिखाई जानी चाहिये, और यह कि हम अपने चैनल आईबीएन 7 पर असम दंगे की खबरें किसी भी परिस्थिति में नहीं दिखाएंगे। एक समुदाय विशेष के बारे में जहर उगलना कहां तक जायज है। आर्ट ऑफ लिविंग तो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की बात करती है। सीरिया, इराक जाने की बात की होती आपने श्रीश्री के 2001 में विश्व हिन्दु परिषद संसद में शामिल होने तथा भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में ‘अन्ना हजारे’ का साथ देने की बात कही है। अच्छा होता इसके साथ-साथ आप श्रीश्री के सीरिया, ईराक, दक्षिणी अमेरिकी देश कोलम्बिया तथा भारत के अन्य हिंसा ग्रस्त और तनाव ग्रस्त क्षेत्रों में भी जाने की बात की होती। आपको स्मरण करा दें कि 2001 के संत सम्मेलन में श्री श्री ने हिस्सा अवश्य लिया था परंतु उन्होंने वहां एक शब्द भी नहीं बोला था। क्या आपने इतने वर्ष की पत्रकारिता के जीवन में किसी विश्व हिन्दु परिषद के नेता का साक्षात्कार किया या उनके साथ बैठे? दिल्ली को हुआ बड़ा लाभ जहां तक महोत्सव का सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा आयोजित होने की बात है, तो आईबीए

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