Dont blame money know the. Money

May

7

2016

कई लोग धन की निंदा करते हैं और उसे समाज की सभी बुराइओं के लिए दोषी ठहराते हैं| कुछ लोग तो उसे दुष्ट ही मानते हैं| केवल धन होने से अहंकार नहीं होता, उसकी उपेक्षा करने से भी होता है| कुछ लोग केवल सहानुभूति आकर्षित करने के लिए धन का त्याग करते हैं और दरिद्रता की आड़ में अहंकार को रखते हैं| लेकिन प्राचीन ऋषि मुनियों ने कभी धन की निंदा नहीं की| वे ये रहस्य जानते थे कि जब तुम किसी वस्तु की निंदा करते हो, तो उससे ऊपर नहीं उठ सकते| वास्तव में उन्होंने धन को इश्वर की अंग समझकर उसका सम्मान किया और उसके मायाजाल से मुक्त हो गए| – श्री श्री रवि शंकर

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